सोम, चंद्रमा के प्रमुख देवता, अन्न का स्रोत हैं और इसलिए आकाशीय जीवों, देवताओं के लिए भी शक्ति का स्रोत हैं. वही समस्त वनस्पतियों की जीवनदायी शक्ति हैं. दुर्भाग्य से, आधुनिक तथाकथित वैज्ञानिक, जो चंद्रमा को ठीक से नहीं समझते, उसे मरुस्थलों से भरा हुआ बताते हैं. चूँकि चंद्रमा हमारी वनस्पतियों का स्रोत है, वह एक मरुस्थल कैसे हो सकता है? चंद्रमा का प्रकाश सभी वनस्पतियों की जीवनदायी शक्ति है, और इसलिए हम यह संभावना नहीं स्वीकार सकते कि चंद्रमा एक मरुस्थल है. जैसा कि प्रबुद्ध विद्वानों द्वारा कहा गया है, चंद्रमा भगवान के परम व्यक्तित्व का मन है. भगवान के परम व्यक्तित्व, सभी एश्वर्यों के स्रोत, हमसे प्रसन्न हों.

स्रोत – अभय चरणारविंद स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेज़ी), “श्रीमद् भागवतम्” , आठवाँ सर्ग, अध्याय 5 – पाठ 34

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