देवकी एक क्षत्रिय की पुत्री थीं और राजनीतिक खेल खेलना जानती थीं.यहाँ हम देखते हैं कि देवकी ने सबसे पहले कंस का ध्यान उसकी नृशंस गतिविधियों, उसके द्वार अपने कई पुत्रों की हत्या पर केंद्रित किया. तब वह यह कहकर उसके साथ समझौता करना चाहती थीं कि उसने जो कुछ भी किया है वह उसकी त्रुटि नहीं है, बल्कि नियति द्वारा निर्धारित है. फिर उन्होंने उससे पुत्री को स्वयं के लिए उपहार के रूप में देने की अपील की. राजनीति में सफलता प्राप्त करने की विभिन्न विधियाँ होती हैं: पहले दमन (दम), फिर समझौता (साम), और फिर उपहार माँगना (दान). देवकी ने अपनी संतानों की क्रूरता पूर्वक हत्या करने के लिए कंस पर सीधे आक्रमण करते हुए सर्वप्रथम दमन की नीति अपनाई. फिर उन्होंने यह कहकर समझौता किया कि यह उसकी गलती नहीं थी, और फिर उऩ्होंने उपहार के लिए प्रार्थना की. जैसा कि हम महाभारत के इतिहास से सीखते हैं, शासक वर्ग, क्षत्रियों की पत्नियाँ और पुत्रियाँ राजनीतिक खेल जानती थीं, किंतु हम कभी नहीं देखते कि किसी स्त्री को मुख्य कार्यकारी का पद दिया गया हो. ऐसा मनु-संहिता के निर्देश के अनुसार है, लेकिन दुर्भाग्य से अब मनु-संहिता का अपमान किया जा रहा है, और आर्य, वैदिक समाज के सदस्य, कुछ नहीं कर पाते. ऐसी कलियुग की प्रकृति होती है.

स्रोत:अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेज़ी), श्रीमद् भागवतम्, दसवाँ सर्ग, अध्याय 04- पाठ 05

(Visited 6 times, 1 visits today)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •