श्रीमद्-भागवतम् भविष्यवाणी करती है कि कलि-युग में शासन दस्यु-धर्म निभाएगा, जिसका अर्थ ठग और चोरों का कर्तव्य है. राज्य के आधुनिक प्रमुख ठग और चोर हैं जो नागरिकों की रक्षा करने की बजाय उन्हें लूटते हैं. ठग और चोर नियमों की परवाह किए बिना लूटमार करते हैं, लेकिन कलि के इस युग में, जैसा कि श्रीमद्-भागवतम् में कहा गया है, विधि निर्माता ही नागरिकों को लूटते हैं. अगली घटना की भविष्यवाणी, जो पहले ही बीतने को है, वह यह कि नागरिकों और शासन के पापमय कृत्यों के कारण वर्षा बहुत कम हो जाएगी. धीरे-धीरे पूरी तरह अकाल होगा और अन्न का उत्पादन नहीं होगा. लोग केवल मांस और बीज खाने तक सीमित हो जाएंगे, और बहुत से अच्छे, आध्यात्मिक रुझान वाले लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ेगा क्योंकि वे सूखा, करों, और अकाल से बहुत परेशान हो चुके होंगे. ऐसे विनाश से विश्व को बचाने की एकमात्र आशा कृष्ण चेतना आंदोलन है. यह संपूर्ण मानव समाज के वास्तविक कल्याण के लिए सबसे वैज्ञानिक और प्रामाणिक आंदोलन है.

अभय चरणारविंद स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेजी), “श्रीमद् भागवतम्”, पाँचवाँ सर्ग, अध्याय 02 – पाठ 01

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