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गीता दैनिक
iandkrsna_user
3419 items
दीक्षा के बाद, शिष्य को बहुत सावधान होना चाहिए कि वह कोई पापमय कर्म न करे.
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वे गीत जो स्वीकृत नहीं हैं या जो प्रामाणिक भक्तों द्वारा नहीं गाए जाते अनुमत नहीं होते.
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भगवान चैतन्य व्यक्ति सदैव प्रसन्न और विजयी होता है.
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कृष्ण चेतना का प्रसार करना परम कल्याणकारी गतिविधि है.
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समुद्र मंथन द्वारा सबसे पहले बहुत बड़ी मात्रा में विष निर्मित होता है.
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सभी लोगों को, भले ही वे कर्मी, ज्ञानी, योगी या भक्त हों, निरपवाद रूप से वासुदेव के चरण कमलों की शरण लेनी चाहिए.
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कोई भी अपना वास्तविक आत्म-हित नहीं समझता.
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भक्त किस प्रकार कर्मियों से हमेशा भिन्न होता है.
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शरीर की सहायता के बिना, व्यक्ति धर्म प्रणाली का निर्वाह नहीं कर सकता.
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पूर्ण रूप से कृष्ण की सेवा में लगे शरीर को भौतिक मानकर उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए.
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