किसी बड़े वन में, मधुकोश बड़े महत्वपूर्ण होते हैं. लोग अक्सर छत्तों से शहद इकट्ठा करने वहाँ जाते हैं, और कभी-कभी मधुमक्खियाँ आक्रमण कर देती हैं और उन्हें दंड देती हैं. मानव समाज में, जो कृष्ण के प्रति सचेत नहीं हैं, वे केवल यौन जीवन के लिए ही भौतिक जीवन के जंगल में रह जाते हैं. इस प्रकार के विषयासक्त एक पत्नी से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं होते हैं. उन्हें कई स्त्रियाँ चाहिए. दिनों दिन, बड़ी मुश्किल से, वे ऐसी स्त्रियों को पाने का प्रयास करते हैं, और कभी-कभी, इस तरह के शहद का स्वाद लेने के प्रयास में, उस पर किसी स्त्री के संबंधियों द्वारा हमला किया जाता है और उसे बहुत प्रताड़ित किया जाता है. दूसरों को प्रलोभन देकर, व्यक्ति पराई स्त्री को भोग के लिए पा सकता है, फिर भी कोई अन्य लंपट उसे हर सकता है या उसे कुछ श्रेष्ठतर देने का प्रलोभन दे सकता है. भौतिक संसार के जंगल में स्त्री का पीछ करना जारी है, कभी नियमानुसार और कभी अवैध रूप में. फलस्वरूप इस कृष्ण चेतना आंदोलन में भक्तों को अवैध संभोग करने से मना किया जाता है. इस प्रकार वे बहुत सी कठिनाइयों से बच जाते हैं. विधिवत विवाह करके एक स्त्री से संतुष्ट रहना चाहिए. समाज में गड़बड़ी पैदा किये बिना और ऐसा करने के लिए दंडित हुए बिना व्यक्ति अपनी पत्नी की काम इच्छाओं को पूरा कर सकता है.

स्रोत:अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेजी), "श्रीमद् भागवतम्", पाँचवाँ सर्ग, अध्याय 13 - पाठ 10
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