जगत उत्पत्ति2020-02-26T07:38:40-05:30

जगत उत्पत्ति

वयक्ति के बलिदान, दान और अन्य पवित्र गतिविधियों के परिणाम समाप्त होने के बाद, व्यक्ति को निम्नतर ग्रह प्रणालियों पर वापस जाना पड़ता है.

ध्रुवलोक नामक, ध्रुवतारा, ब्रम्हांड की धुरी है, और सभी ग्रह इसी ध्रुवतारे की परिक्रमा में ही गति करते हैं.

समय का कारक इतना बाध्यकारी होता है कि कालांतर में इस भौतिक संसार की सभी वस्तुएँ समाप्त हो जाती हैं या खो जाती हैं.

Deity Darshan

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