यमराज द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि व्यक्ति को अगली बार उसके पिछले कर्मों के अनुसार किस प्रकार का शरीर मिलेगा.

कलियुग में, कोई भी जीव पापमय गतिविधि का पीड़ित तब तक नहीं बनता जब तक कि वह कृत्य वास्वव में नहीं किया जाता.

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