अश्विनी कुमारों जैसे स्वर्गीय चिकित्सक उन लोगों को भी युवावस्था से भरा जीवन दे सकते थे जिनकी आयु अधिक हो गई हो. निश्चित ही, महान योगी अपनी रहस्यमयी शक्ति से, एक मृत शरीर को भी वापस जीवित कर सकते हैं, यदि शरीर रचना अक्षत हो. हम इसकी चर्चा बाली महाराज के सैनिकों और शुक्राचार्य द्वारा उनके उपचार के संबंध में पहले ही कर चुके हैं. आधुनिक चिकित्सा शास्त्र अभी तक नहीं खोज पाया है कि किसी मृत शरीर को वापस जीवत कैसे किया जाए या किसी वृद्ध शरीर में युवावस्था की ऊर्जा को कैसे लाया जाए, किंतु इन श्लोकों से हम समझ सकते हैं कि ऐसा उपचार संभव है यदि व्यक्ति वैदिक सूचना से ज्ञान लेने में सक्षम हो. अश्विनीकुमार आयर्वेद के विशेषज्ञ थे, वैसे ही धन्वंतरि भी. भौतिक विज्ञान के किसी भी विभाग में, महारत प्राप्त करना होती है, और वह पाने के लिए व्यक्ति को वैदिक साहित्य का अध्ययन करना ही होता है. सबसे उत्तम संपूर्णता भगवान का भक्त बनना होती है. इस संपूर्णता को पाने के लिए, वयक्ति को श्रीमद्-भागवतम् का अध्ययन करना चाहिए, जिसे वैदिक कल्प वृक्ष का पका हुआ फल समझा जाता है (निगम-कल्प-तरोर्गिलितम फलम्).

स्रोत – अभय चरणारविंद स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेज़ी), “श्रीमद् भागवतम्”, नवाँ सर्ग, अध्याय 3 – पाठ 11

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