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iandkrsna_user
3419 items
इस युग के लोग भगवान के परम व्यक्तित्व के ऐश्वर्य को समझने में धीमे हैं.
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भगवान का गुणगान व्यक्ति के हृदय से मैल को पूर्ण रूप से मिटा देता है.
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परम भगवान की आत्म निर्भरता का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे अपने भक्तो पर निर्भर रहते हैं.
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जीवों द्वारा विभिन्न प्रकार के शरीर स्वीकारे जाने के लिए भगवान उत्तदायी नहीं हैं.
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यज्ञ का अर्थ विष्णु है.
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सत्यलोक में भगवान ब्रम्हा के साथ निवास करने वाले देवता वैकुंठलोक को जाते हैं.
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भगवान कृष्ण मूल रचियता हैं और भगवान ब्रम्हा द्वितीय रचियता है.
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बुद्धिहीन पशु भी भगवान के परम व्यक्तित्व के पुत्र होते हैं.
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भगवान कभी-कभी अपनी युद्ध भावना को प्रकट करने के लिए एक अवतार के रूप में भौतिक संसार में आते हैं.
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व्यक्ति के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह भगवान को स्वीकार कर सकने के पहले उन्हें देखे.
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