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iandkrsna_user
3419 items
आध्यात्मिक संसार में कोई यौन संबंध नहीं होते.
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मानव एक सामाजिक प्राणी है और रूपवान लिंग से उसका अप्रतिबंधित मेलजोल पतन की ओर ले जाता है
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हम अपनी इंद्रियों के नियंत्रित कैसे कर सकते हैं? मुझे अपनी काम वासना को नियंत्रित करना कठिन लगता है.
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जितना अधिक व्यक्ति यौन सुख का आसक्त होता है, उतनी ही शीघ्रता से उसकी मृत्यु होने की आशंका होती है.
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मोक्ष की प्राप्ति के लिए अनुकूल संतति का निर्माण करके व्यक्ति भगवान की सेवा कर सकते हैं.
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स्त्रीगमन एक अनावश्यक बोझ है जो आत्म-ज्ञान को बाधित करता है.
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यहाँ तक कि ब्रम्हा जैसे महान देवता और भगवान शिव भी स्त्री सौंदर्य से मोहित हो जाते हैं.
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आध्यात्मिक संसार में यौन जीवन का कोई महत्व नहीं है.
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सामान्यतः, पुरुष की प्रवृत्ति कई स्त्रियों के भोग की होती है.
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स्त्रियों की काम वासना पुरुषों की अपेक्षा नौ गुना अधिक बलवान होती है.
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