भगवान विष्णु सारे सौभाग्य का पालन करते और उसे अर्जित करते हैं. भगवान विष्णु भौतिक संसार की रचना में भगवान शिव के माध्यम से भूमिका निभाते हैं. भगवान शिव ही भगवान विष्णु की ओर से व्यवहार करते हैं. जब भगवान भगवद्-गीता (14.4) में कहते हैं कि वे ही सभी जीवों के पिता हैं (अहम् बीज-प्रदः पिता), तो इसका आशय वे कर्म हैं जो भगवान विष्णु भगवान शिव के माध्यम से करते हैं. भगवान विष्णु भौतिक गतिविधियों से हमेशा विलग रहते हैं, और जब भौतिक गतिविधियाँ करने की आवश्यकता होती है, तो वे उन्हें भगवान शिव के माध्यम से निष्पादित करते हैं. इसलिए भगवान शिव की उपासना भगवान विष्णु के स्तर पर की जाती है. जब भगवान विष्णु बाहीय ऊर्जा के संपर्क में नहीं रहते हैं तो वे भगवान विष्णु होते हैं, किंतु जब वे बाहीय ऊर्जा के संपर्क में होते हैं, तो वे भगवान शिव के रूप में दिखते हैं.

स्रोत – अभय चरणारविंद स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेज़ी), “श्रीमद् भागवतम्” , आठवाँ सर्ग, अध्याय 7 – पाठ 22

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