भौतिक प्रकृति का दोहन करने का प्रयास कर रही दूषित आत्माओं को धीरे-धीरे ठीक करने के लिए ब्रह्मांड की रचना की गई है. भगवान बद्धजीवों को उनके कर्म के अनुसार आध्यात्मिक उद्धार के विभिन्न चरणों के माध्यम से साथ ले चलते हैं. इस प्रकार से भगवान एक ग्वाले के समान हैं (शब्द पशु-पाल का शाब्दिक अर्थ है “पशुओं का रक्षक”), जो अपने संरक्षण में जीवों को उनकी रक्षा करने और उनका पालन करने के लिए विभिन्न चरनोइयों और पानी के स्थानों में ले जाते हैं. एक और समानता किसी चिकित्सक की है, जो रोगी को अपनी देखरेख में चिकत्सालय के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की जाँच और उपचार के लिए ले जाता है. इसी प्रकार, भगवान हमें भौतिक अस्तित्व के तंत्र के माध्यम से निर्मलता की एक चरणबद्ध प्रक्रिया में लाते हैं ताकि हम उनके प्रबुद्ध सहयोगियों के रूप में आनंद और ज्ञान के अपने शाश्वत जीवन का आनंद ले सकें.

स्रोत:अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेज़ी), श्रीमद् भागवतम्, दसवाँ सर्ग, अध्याय 51- पाठ 19

(Visited 5 times, 1 visits today)
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •