प्रत्येक वैदिक मंत्र को ब्रम्हा कहा जाता है क्योंकि प्रत्येक मंत्र से पहले ब्रम्हाक्षर (ऊँ या ऊँकार) आता है. उदाहरण के लिए ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय. भगवान कृष्ण भगवद-गीता (7. 8) में कहते हैं, प्रणव सर्व-वेदेषु: “सभी वैदिक मंत्रों में, मेरा प्रतिनिधित्व प्रणव, या ऊँकार द्वारा किया जाता है.” इस प्रकार ऊँकार से शुरू होने वाले वैदिक मंत्रों का जाप सीधे कृष्ण के नाम का जाप है. इसमें कोई अंतर नहीं है. चाहे कोई ऊँकार का जाप करे या भगवान को “कृष्ण” संबोधित करे, परंतु श्री चैतन्य महाप्रभु ने सुझाया है कि इस युग में हरे कृष्ण मंत्र (हरेर्नाम एव कैवलम) का जाप करें. यद्यपि हरे कृष्ण और ऊँकार से प्रारंभ होने वाले वैदिक मंत्रों में कोई अंतर नहीं है, तब भी इस युग के लिए आध्यात्मिक आंदोलन के प्रणेता श्री चैतन्य महाप्रभु सुझाव देते हैं कि वयक्ति को हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण, हरे हरे/ हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे का जाप करना चाहिए.

अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद (2014 संस्करण, अंग्रेजी), “श्रीमद् भागवतम्”, छठा सर्ग, अध्याय 5- पाठ 26

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