भौतिक जीवन का अर्थ कामक्रीड़ा है. रात में थोड़े यौन सुख के लिए लोग दिन भर कड़ा परिश्रम करते हैं. भौतिक संसार में सभी व्यक्ति कामदेव के तीखे तीर से पीड़ित हैं. मदन, कामदेव, यह तीर सभी स्त्री पुरुषों पर छोड़ते हैं ताकि वे एक-दूसरे के लिए कामान्ध हो जाएँ; हालाँकि, जब कोई कृष्ण को वास्तव में खोजता है, तब उसे मदन-मोहन, कामदेव के सम्मोहक दिखाई देते हैं. तब व्यक्ति को कामदेव के बाण से चोट नहीं लगती. इसका अर्थ है कि वास्तव में व्यक्ति निडर हो जाता है. वह भक्ति-योग में प्रवेश कर सकता है और इस भौतिक संसार को त्याग सकता है. शास्त्रों के अनुसार, श्रेयस और प्रेयस है. श्रेयस अंतिम लक्ष्य है. हमें ऐसे कर्म करने चाहिए कि अंततः हम प्रसन्न हो सकें. हालाँकि, यदि हम तुरंत प्रसन्नता चाहते हैं और भविष्य का ध्यान नहीं रखते, ते हम प्रेयस की इच्छा करते हैं. प्रेयस बुद्धिहीन लोगों और बच्चों के लिए है. एक बच्चा दिन भर खेलना पसंद करता है; वह नहीं चाहता कि उसे शिक्षा पाने के लिए पाठशाला भेजा जाए. शिक्षा श्रेयस, अंतिम लक्ष्य है. इसमें किसी को रुचि नहीं होती. शास्त्र हमें श्रेयस का लक्ष्य करने के लिए निर्देश देते हैं और प्रेयस से आकर्षित होने से मना करते हैं. सर्वोत्तम प्रेयस भक्ति-योग है.

स्रोत: अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद (2007 संस्करण, अंग्रेजी), "भगवान कपिल, देवाहुति पुत्र की शिक्षाएँ", पृष्ठ 251
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